कविता का महत्व

राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'

रचनाकार- राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'

विधा- कविता

जनम लिया तो अम्मा ने कविता से सहलाया था,
जब जब रोया, तब तब उसने कविता से बहलाया था,
कविता की ही दादी नानी ने लोरी एक सुनाई थी,
आजादी से पहले कविता राष्ट्रगान बन आई थी।

अरे गांधी से अन्ना तक कविताओं ने ही तो क्रांति जगाई थी,
कविता सी ही बाबा तुलसी ने लिखी एक चौपाई थी।

राष्ट्रगान और वंदे मातरम् कविता से,जिनकी रक्षा का बीड़ा हम उठाते हैं,
जिसकी खातिर सीमा पर होली रोज मनाते हैं,
सुन कर जिन कविताओं को वो सीने पर गोली खाते हैं,
वैसी ही कविता लिखता हूँ, मत खुद को रोको,
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राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'
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न मंजिल पता है, न डगर हमें मालूम है, रुकना कहाँ है, मुझे नहीं मालूम है, धक्का दे रहा है ये जमाना मुझे, कहाँ धकेलना चाहता है ,ये मुझे नहीं मालूम है।
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