कल की किशोरी आज की नारी

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- कविता

कल की किशोरी
आज की नारी

मैं हूँ बच्ची, कल की किशोरी,
भविष्य की हूँ मैं समस्त नारी ||
मैं लक्ष्मी, मैं उमा, मैं हूँ शारदा,
जानो ये दुनिया मैंने ही सँवारी ||

सतरंगे लक्ष्य लेके मैंने जग को,
इंद्रधनुषी सप्त रंग से सजाए हैं ||
दिनकर की तेज़ लेके मैंने जग,
को जगमग-जगमग चमकाए हैं ||

मुझमें है गर चाँद-सी शीतलता,
तो देने को है अँधेरे में उजाला ||
मुझ में है गर गौमाँ-सी ममता,
तो देने को है घोर शर्द में ज्वाला ||

अनसूइया,गार्गी, सीता,सावित्री
की आत्मा मुझ में ही बसती है ||
लक्ष्मी बाई-सरोजनी-इंदरा गाँधी
की छाया मुझ पर ही उगती है ||

मुझमें देखो हैं कस्तुरबा गाँधी,
देखो मुझमें बैठी भक्त शारदा ||
मैं ही हूँ स्वर साम्राज्ञी लता मैया,
मुझमें है छुपी सुनीता चावला ||

मैं वीरांगना, मैं विदुषी, मैं सर्वज्ञा,
मैं सबला हूँ मेरी ओजस्वी कहानी ||
हाथों में है कटार, आँखों में अंगारे,
दिल में पाषाण, चपलता तूफ़ानी ||

मैं धरती, मैं सृष्टि, मैं हूँ प्रकृति,
मैं चाहूँ बालक को सज्ञान बना दूँ ||
मैं जननी, मैं धरणी, मैं निर्मात्री,
धरूँ लक्ष्य पुरूष को महान बना दूँ ||

मैं पुत्री, मैं भार्या, मैं ही हूँ माता,
चौतरफ़ा जग में है मेरा जलवा ||
मेरे ही इर्द-गिर्द सारा जग घूमता,
मेरी ही तूती चलती यश की हवा ||

नारी शक्ति, नारी देवी नारी नर-
नारी व जग की होती महतारी ||
प्रेम, करूणा, सम्मान, सेवा की
होती है जग में सच्ची अधिकारी ||

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दिनेश एल० "जैहिंद"
24. 01. 2017

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दिनेश एल०
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मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,
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