कल्पना से परे

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

कल्पना से परे जो जहान है
मिले तुझे ये मेरा अरमान है
फूलों से भरी जो राहें हैं
मिले उन्हें जो तेरे पांव हैं ।।

चमकता जो रात मे चांद है
मिले उससे भी खूबसूरत तुझे जो शबाब है
कोयल की मीठी जो आवाज है
मिले जुबान तुझे कशिश जिसमे लाजवाब है ।

बरगद के वृक्ष मे जो छाया है
मिले तुझे सुखों से भरा जो साया है
तारों से भरा जो आकाश है
मिले आंगन तुझे बरसता जिसमे प्यार है ।

सागर मे जो खूबसूरत मोती हैं
मिले तुझे श्रंगार के जो आभूषण हैं
बहारों मे जो फूलों की खुशबु है
मिले महक उसे काया जो तेरी है ।।

राज विग

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