कलयुग और सतयुग

Mamta Rani

रचनाकार- Mamta Rani

विधा- कविता

कलयुग का अंत होने वाला है,
सतयुग आने वाला है।
कलयुग में तो पाप् हिंसा बढ़ गया है,
कलयुग में तो लोग प्यार त्याग को भूल गए हैं।
और एक दूसरे से यहाँ पे लड़ रहे ह।

कलयुग तो अधर्म की,
जन्मभूमि बन गई है।
इससे धरती माता बोझ तले,
दब गई है।
कलयुग में तो लोग,
एक-एक पैसे के लिए।
अपने और परायों को भी ,
भूल रहे है।

कलयुग में तो पैसे को ही,
सब कुछ माना जाता है।
और अपने माँ बाप को,
घर से बाहर कर दिया जाता है।

किसी पर जुल्म होते देख,
किसी को दया नहीं आती है।
देख कर भी अनदेखा जैसे करते है

कलयुग का अंत होने वाला है,
सतयुग आने वाला है।

लोग भगवान तक को भी छोड़ते नहीं है,
उनकी आढ़ में काले धंधे करते है।
कलयुग में तो पैसे को ही भगवान माना जाता है।
और भगवान के बदले ,
पैसों की ही पूजा की जाती है।

कलयुग में तो रोग बढ़ रहे हैं,
इससे लोग दुखी हो रहे है।

कलयुग का अंत होने वाला है,
सतयुग आने वाला है।
सतयुग का अर्थ होता है,
सत्य का जमाना।
सतयुग में तो राजा हरिश्चंद्र जैसे,
बेटे  जन्म लेंगे।
और अपने माँ बाप का नाम रौशन करेंगे।
सतयुग में लोग सिर्फ धर्म को ही अपनाएंगे।

कलयुग का अंत होने वाला है,
सतयुग आने वाला है।

नाम-ममता रानी ,राधानगर,(बाँका)

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Mamta Rani
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