कर दी मैली…..

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

बदल गये गंगा तट वासी
पर न बदली गंगा माँ
सच में माँ तो माँ ही है
सदियो से वही निर्मल पवित्र
धारा***
पालनहार इस धरा पुत्रो की
सहनशीलता की मूर्ति है माँ
सहन करते करते पापो को
फिर भी तू न बदली माँ,
बदल गये हम स्वार्थ में
विकास की चाह में
चल पड़े विनाश में,
करनी थी तेरी रक्षा-सेवा
बदले में कर दी हम नासमझों ने
"गंगा" मैली तेरी धारा,
सच में माँ तो माँ ही है
सदियो से वही निर्मल पवित्र
धारा***
कब तक सहन करेगी माँ
इससे पहले तुझ को क्रोध आये
माँ इतनी कृपा करना
माँ इतनी दया करना
हम नासमझ समझ जाये
सुधर जाये।।
"जय गंगा माँ"💐💐💐

^^^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^^^

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Author
Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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2 comments
    • *एक बार मैने मॉ गंगा से पुछा -*
      “हे माता, आप लाखों वर्षों से लोगों के पाप धो रही हैं | आखिर आप इतने सारे पापों का क्या करती हैं ?”
      मां गंगा बोली. *”मै सारे पाप समुद्र मे डाल देती हुं |”*
      मैने समुद्र से पुछा – *”आप क्या करते हैं इतने पापों का ?”*
      समुद्र ने जवाब दिया. *”मै सारे पाप बादलों को सौंप देता हूं |”*
      मैने बादलों को पुछा – *”आप कहां ले जाते हैं, इतने पापों को ?”*
      *”मै उऩहे पानी बनाकर वहीं बरसा देता हूं, जहां से वो आए थे |”*
      बादलों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया |
      *The Moral thing is:-* कुदरत हमे वही लौटाती है, जो हम उसे देते हैं |