करता है जो मुहब्बत बदनाम ही तो है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

नज़रें हया से झुकना ये सलाम ही तो है
करता है जो मुहब्बत बदनाम ही तो है

क्यूँ जाएँ मैक़दे में पीने वास्ते
आँखों से रोज पीना इक जाम ही तो है

इस आगरे के ताज को इमारत न मानिए
दुनिया को इश्क़ का ये पैग़ाम ही तो है

जाओ न अपनी बाँहें ऐसे छुड़ा के तुम
कुछ और पल ठहर जा ये शाम ही तो है

है दर्द सहना इश्क़ में दिल का वो टूटना
दिल्लगी में दिलवर से ईनाम ही तो है

हम क़त्ल हो चुके सनम तेरी निगाह से
फिर भी लवों पे मेरे तेरा नाम ही तो है

लाजिम न तुमको कहना हूँ देखता तुम्हें
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

रूठो न हमसे तुम यूँ ही तेरे ख़याल में
दिन रात खोये रहना ये काम ही तो है

जो लोग दर्द झेलते ग़ैरों के वास्ते
दुनिया में आज़ "प्रीतम" गुमनाम ही तो हैं।।

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।
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