कमी हिम्मत में कुछ रखती नहीं मैं——- गज़ल

निर्मला कपिला

रचनाकार- निर्मला कपिला

विधा- गज़ल/गीतिका

कमी हिम्मत में कुछ रखती नहीं मैं
बहुत टूटी मगर बिखरी नहीं मैं

बड़े दुख दर्द झेले जिंदगी में
मैं थकती हूँ मगर रुकती नहीं मैं

खरीदारों की कोई है कमी क्या
बिकूं इतनी भी तो सस्ती नहीं मैं-

रकीबों की रजा पर है खुशी अब
न आये वो मगर लडती नहीं मैं

बडे दिलकश फिजायें थी जहां में
लुभाया था मुझे भटकी नहीं मैं

मुहब्बत का न वो इजहार करता
मगर आँखों में क्यों पढती नहीं मैं

अगर चाहूँ फलक को भी गिरा लूं
बिना पर के मगर उड़ती नहीं मैं

थपेडे ज़िन्दगी के तोड़ देते
नहीं इतनी भी तो कच्ची नहीं मैं

मैं खुद की सोच पर चलती हूँ निर्मल
किसी के जाल में फंसती नहीं मैं

Views 80
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
निर्मला कपिला
Posts 71
Total Views 10.4k
लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण रेडिओ विविध भरती जालन्धर से कहानी- अनन्त आकाश का प्रसारण | ब्लाग- www.veerbahuti.blogspot.in

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
2 comments