कभी लेखनी कहती है ।

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- गज़ल/गीतिका

कभी कभी कागज कहता है ,
कभी लेखनी खुद कहती है
आज तुम्हें कुछ लिखना हैं ।
नही आ रहा तो सिखना है ।
कभी कभी मेरा मन कहता है,
कभी कभी चिंतन कहता है ।
आज कही कुछ सृजना है,
मन की बातें लिखना हैं ।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

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Vindhya Prakash Mishra
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