कभी कली पे भी हुस्नो ज़माल आएगा

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

उरुज आज है तो कल ज़वाल आएगा
अगर माँ बाप को घर से निकाल आएगा

दगा है खून में तेरे पता नही तुझको
किसी तो रोज तुझे ये मलाल आएगा

वतन के दूर अँधेरे तभी हो जाएंगे
के जब तू क्रांति की लेकर मशाल आएगा

सहेगा बेटी की रुसवाइयाँ भला कब तक
कभी तो खून में तेरे उबाल आएगा

न रुक सकेंगे क़दम उसके आज मिलने से
के दर्द आँखों में जब तू भी पाल आएगा

न सोच ये कि अभी उम्र उसकी कमसिन है
कभी कली पे भी हुस्नो ज़माल आएगा

न मानता तू बुज़ुर्गों की इस नसीहत को
तो जख़्म खाके तू दिल पर निढाल आएगा

दिखा तो रोक के जज्बात दिल के तू "प्रीतम"
नदी में दिल के कभी तो उछाल आएगा

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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