कपकपाते हैं हाथ मेरे..

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

कपकपाते हैं हाथ मेरे,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
याद आते हैं वो जख़्म गहरे,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

सूखने लगती हैं मेरी कलम की स्याही,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
पूछने लगती हैं तुम्हारी माई,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

तुम्हारी पत्नी रूठने लगती हैं,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
किसी की मंगनी टूटने लगती हैं,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

मैं शर्मिंदा होने लगता हूँ,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
कुछ मासूमों पर रोने लगता हूँ,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में…

(वीर शहीदों को समर्पित)

– © नीरज चौहान

Views 80
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neeraj Chauhan
Posts 57
Total Views 5.5k
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia