कन्यादान

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

नही कर्ण भी समता रखता नही कर्ण का दान महान,
सब दानों से बढ़कर होता एक बेटी का कन्यादान!

पिछले कितने सुकर्मों से, बेटी पैदा होती है,
गृहस्थी के संचालन में जो धैर्य कभी न खोती है

बेटे किसी मोड़ पर धोखा , दे दे भला कौन क्या जाने
पर निश्चित बेटी आएगी मात पिता को गले लगाने

शुभ गुण मंदिर सुन्दर है, जिस घर में बेटी होती है
बेटी का जिस पर हाथ लगे,पत्थर बन जाये मोती है

नही कभी वह अपनी होती, उसके साथ परायापन हैं
आँख में आंसू, कटु विदाई, बेटी ऐसा तेरा जीवन है

वह कोई संतान नहीं है है ईश्वर का एक वरदान
सब दानों से बढ़कर होता एक बेटी का कन्यादान।

– नीरज चौहान

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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