कठिन बहुत जीवन की राहें…

सतीश तिवारी 'सरस'

रचनाकार- सतीश तिवारी 'सरस'

विधा- गीत

कभी-कभी लगता है हमको,
कठिन बहुत जीवन की राहें,
०००
जो कुछ भी उपलब्ध हमें है,
उसको हम पहचान न पाते.
जो कुछ अपने पास नहीं है,
मिलेगा कैसे जान न पाते.
पूर्ण हों कैसे उर की चाहें,
कठिन बहुत जीवन की राहें.
०००
जिस पर अपना जोर न कुछ भी,
जिद क्यों फिर उसको पाने की.
बड़ी अजब लगती है प्यारे,
महफ़िल उर के मयख़ाने की.
समझ न पड़तीं दिल की आहें,
कठिन बहुत जीवन की राहें.
०००
समय पकड़ न पाये समय पर,
अब पछताने से क्या होगा.
रहे हारते जंग-ए-ज़िन्दगी,
अब जय-गाने से क्या होगा?
मिलें जीत की कैसे बाँहें,
कठिन बहुत जीवन की राहें.
*सतीश तिवारी 'सरस',नरसिंहपुर

Views 28
Sponsored
Author
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia