कचरे का ढेर

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

कमाया ,
ठीक कमाया
और बहुत
कमाया ;
नाम भी , धन भी ।

अपनी कला से
किया लोगों का
मनोरंजन भी ।

नगर-नगर
गलियों-गलियो
में खूब
मचाई धूम ।

पुरस्कारों से
सजा, तुम्हारे
घर का
ड्राइंग-रूम ।

अब तुम
अपने-आप को
समझ बैठे
सरताज़ ।

वक्त़ को ही
मान बैठे
तुम , अपना
ही दास ।

वक्त़ ने बदली
जो , करवट ।
हुआ एक
सुंदर विस्फोट ।

नज़र आई
अब लोगों को
केवल तुम में
खोट ही खोट ।

पुन : तऱाशा
गया तुम्हें जो
निकला बस
"कचरे का ढेर" ।

छि:-छि: करती
जनता तुमसे ।
कचरे से जो
निकली गंध
नाक बंद कर
सबने थूँका ।

पोस्टरों और चित्रों
को, लोगों ने
अग्नि में फूँका ।

वातावरण
हुआ सब दूषित ।

हुए आप जो
आज कलंकित ।

क्यों? ………
क्यों ?………
क्योंकि –
साधन के ही
तुम साधक थे ।

स्वारथ के तुम
आराधक थे ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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