और दिव्य सद्ज्ञान,प्राप्तिहित गुरु-गुण गह जन

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

जन गह कर ज्ञ-उच्चता, बने नेह-सद्हर्ष |
देव-तुल्य सम्मान का, छू ले वह उत्कर्ष ||
छू ले वह उत्कर्ष ,बोधमय शुभ सूरज बन|
पकड़ सघन आनंद , मुस्कराए जग-भ्रम हन||
कह "नायक" कविराय, भावरूपी प्रेमी धन
और दिव्य सद्ज्ञान, प्राप्तिहित गुरु -गुण गह जन||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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