*. और क्या चाहिए *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गज़ल/गीतिका

महफूज़ दिल के सिवा और क्या चाहिए

दिया दर्देदिल के सिवा और क्या चाहिए

नजरें इश्क से सराबोर और क्या चाहिए

गुफ़्तगू नम- नजरों से और क्या चाहिए

इश्क तुमसे है बेशुमार और क्या चाहिए

मुझसे ना कर इज़हार और क्या चाहिए

ख़ामोश रह कर प्यार और क्या चाहिए

मुहब्बत कर-कर वफ़ा और क्या चाहिए

मरतें सिरत-सूरत-दफ़ा और क्या चाहिए

देखले अक्स अपना ऐसा आईना चाहिए

बेवफ़ा हैं बावफ़ा हैं ऐसा रहनुमा चाहिए

महके स्वांसे खुशबू का अहसास चाहिए

और क्या चाहिए अहसासे-जहां चाहिए

चलती है बादे-नसीम और क्या चाहिए

करले अपने दिल से वफ़ा पहले सनम

गर सनम मुझसा बेवफ़ा-बावफ़ा चाहिए

लोग कहतें हैं मुझको चोर -चितचोर

और क्या चाहिए सनम हमसा चाहिए ?

👍मधुप बैरागी

Sponsored
Views 48
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 409
Total Views 9.6k
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia