**औरत का सम्मान हम सबका सम्मान**

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

माँ बहन बेटी बहु ये रूप अनेकों रखती है !
कोमल कोमल दो हाथों से काम हजारों करती है !
सारा दिन ये काम करे पर फिर भी नहीं ये थकती है !
औरत ही वो हस्ती है जो हर इक दिल में बसती है !
हर घर में वास है इसका रूप चाहे फिर जो भी हो !
सबको प्यार ये देती है फिर रिश्ता चाहे जो भी हो !
अपने और गैर में भेद नहीं मान ये सबका करती है !
अपनी ख़ुशी से ज्यादा ये ध्यान अपनों का रखती है !
औरत का दिल दरिया है प्यार की ये मूरत है !
छोटा हो या बड़ा चाहे हर जन को इसकी जरूरत है !
माँ बहन बेटी बहु जो करें हजारों काम !
क्या फर्ज हमारा नहीं बनता इनको हम सब दें सम्मान ?
इनको हम सब दें सम्मान इनको हम सब दें सम्मान …!!

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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