ऐ ज़िन्दगी तू कड़वी थी हम फ़िर भी पी गए

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

रचनाकार- मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

विधा- गज़ल/गीतिका

कुछ ज़ख़्म वक़्त ने भरे कुछ यूंही सी गए
ऐ ज़िन्दगी तू कड़वी थी हम फ़िर भी पी गए
"
जिनको समझते आये ये रिश्ते हैं ख़ून के
वो रिश्ते मेरे जिस्म का ही ख़ून पी गए
"
जलने के बाद घर वो उजालों से हैं ख़फ़ा
क्यों लेके उनके शहर मे तुम रौशनी गए
"
हमको सिला ये ख़ुदकुशी करने का है मिला
दुनिया से हाथ धो लिए जन्नत से भी गए
,
जो तीस मार खान थे वो भी मरे (क़मर)
कब लेके अपने साथ मे वो ज़िन्दगी गए
,
आमिर क़मर सन्दीलवी

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