** ऐ हुस्नवाले **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गज़ल/गीतिका

ऐ हुस्नवाले तूं इश्क का एहतिराम कर

यूं ठुकरा ना बेदर्दी इबादत-ए-इश्क ।

तेरी फ़ितरत नही क्या फ़जल-ए-दोस्त

अदावत है किस वज़ह से इजहार कर।

क्या एतबार नहीं मेरे इश्क पे हमदम

निहायत है मुफ़ीद तिजारत-ए-इश्क।

अब करदे हवाले हुस्न मेरे मरहम

ऐ हुस्नवाले तूं इश्क का एहतिराम कर
।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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