ऐ जिन्दगी

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- अन्य

(1)🌹🌹🌹🌹
ऐ जिन्दगी किससे शिकायत करूँ
सोना भी छुआ तो कोयला बन गया।
रफ्ता -रफ्ता मेरे सभी अरमान जल गए
जख्मी हृदय पर अनगिनत फफोला बन गया।
🌹🌹🌹🌹

(2)🌹🌹🌹🌹
ऐ जिन्दगी
आ तुझे हँसना सिखा दूँ।
जख्मी दिलों पर
आ मैं थोड़ा मलहम लगा दूँ।
🌹🌹🌹🌹—लक्ष्मी सिंह💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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