ऐ ज़िन्दगी !

kamni Gupta

रचनाकार- kamni Gupta

विधा- गीत

अजीब कशमकश से गुज़र रही है क्यूं।
ऐ ज़िन्दगी आजकल संवर रही है क्यूं।

बहुत पीछे रह गया है वो मोड़ अब ;
वहां लाकर मुझे ठहर रही है क्यूं।

ऐ ज़िन्दगी………

कहना था बहुत कुछ मुझको तब मगर;
उन शब्दों को ढूंढ के सहर रही है क्यूं।

बदल गया वक्त और मैं भी देखो तो;
आइने सी अब मुझको लहर रही है क्यूं।

ऐ ज़िन्दगी…….

यादों के पन्ने थे यूंही धुंधले से हो गए;
ख्वाबों को पँख दिखा पसर रही है क्यूं।

जिस गली में तेरा आना जाना था बहुत;
मंज़िल मेरी उसी राह से गुज़र रही है क्यूं।

ऐ ज़िन्दगी……….

कामनी गुप्ता***
जम्मू !

Sponsored
Views 11
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
kamni Gupta
Posts 41
Total Views 1.1k
I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby. Sanjha sangreh.... Sahodri sopan-2 Deepshikha Satyam prabhat Mehkte lafz.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia