*** ऐ चाँद ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

ऐ चांद 💫 तेरी रौशनी
दुनियां को शीतल कर दे
मेरे हृदय की आग को
क्यों ठण्डा नहीं करती
ऐ चांद 💫क्या तुम भी
भेदभाव 🌃 करते हो
इन्सां-इन्सां 🚣के बीच
रोशनी सब📣के लिए है
मेरे लिए 🐼 अंधेरा क्यूं
ऐ चांद खुदा जन्नत में है
मेरी शिकायत कह देना
कहते लोग नूर-ए-खुदा
जगमग जहां करता है
तूं भी तो उसी के नूर से
रोशन आसमां में होगा
ना दोष दूंगा मैं तुझको
एक चांद जमीं पर है जो
मुझको बेताब करता है
शायद उपरवाला भी
मुझसे से जलता है
इसीलिए मुझे बार-बार
छलता है छलता है
फिर भी मेरे अंदर वही
प्रेम पलता है पलता है
ऐ चांद उस बेखबर को
तो खबर कर दो जिसके
लिए ये दिल जलता है।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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