“ऐ चाँद !ना हँस मेरी तन्हाई पर “

Dr.Nidhi Srivastava

रचनाकार- Dr.Nidhi Srivastava

विधा- कविता

ऐ चाँद ! ना हँस मेरी तन्हाई पर ,
तू भी अकेला है मेरी तरह |
तेरी रोशनी भी उधार की है ,
मेरी गुमसुम हँसी की तरह ||

ऐ चाँद! ना रूठ मेरे शब्दों से,
तू भी उदास है मेरी तरह |
चल रहा है अथक तू भी,
मेरी थकान भी तेरी तरह ||

ऐ चाँद ! ना रो मेरे दर्द पर ,
तू भी तड़प रहा मेरी तरह |
मत बहा आँसू तन्हाई के,
हँस ले तू भी मेरी तरह ||

ऐ चाँद !ना हँस मेरी तन्हाई पर |
ऐ चाँद !ना हँस मेरी तन्हाई पर ||

…निधि…

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Dr.Nidhi Srivastava
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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"

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2 comments
  1. ये चॉद ! ना हँस मेरी तन्हाई पर
    तू भी तन्हा है मेरी तरह।।
    बहुत सुंदर रचना है यह , डा निधि श्रीवास्तव जी की ।
    —- जितेंद्र कमल आनंद
    १६-११-१६ रामपुर ( उ प्र )