ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..

Ankit Kumar Dwivedi

रचनाकार- Ankit Kumar Dwivedi

विधा- कविता

ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..
जीवन के उन्मादों को सहता जाता हूँ,
कभी -२ तो डरता और सहमता भी हूँ,
पर ऐसे मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कुछ कई पुरानी यादों से ,
कुछ कही पुरानी बातों से ,
मैं यों ही बातें कर जाता हूँ,
और ऐसे ही मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कभी खुशी में शामिल हो कर ,
कभी दुखों में शिरकत करके,
जीवन के सुख दुख को सह जाता हूँ ,
और ऐसे ही मैं दिल बहलाता हूँ।
कभी समय जब खाली पाता ,
युं ही कुछ मैं लिख जाता हूँ,
भावों से अपने मन को समझाता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
जब याद मुझे आती है तेरी ,
युं ही न सबकों दिखलाता हूँ,
एकांक में जाकर रो आता हूँ,
तस्वीर से तेरी मिल आता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।।

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Ankit Kumar Dwivedi
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मेरा नाम अंकित कुमार द्विवेदी है। मैं अभी 19 वर्ष का हूँ और कंप्यूटर साइंस का छात्र हूँ। कविताओं में मेरी रुचि बहुत अधिक है और मै मुक्त छन्द की विधा में कविताओं का सृजन करता हूँ। सामाजिक विषयो पर लिखना मुझे बहुत पसंद हैं। संपर्क सूत्र-9451165887

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