ऐसे चमकेगा विश्व में भारत का नाम

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- लेख

भारत और दूसरे देशों के मित्रों के बीच एक मीटिंग हुई । चर्चा थी देश के बारे , सभी ने अपने अपने देश के बारे तर्क दिए , सभी ने कहा भारत के लोगों में तो दम ही नहीं वे पिछड़े है और पिछड़े रहेंगे ।

काफी देर चुप रहने के बाद उस व्यक्ति ने कहा भारत सदियों से सोने की चिड़िया था आज भी है और कल भी रहेगा । विश्व के कई देश व्यापारिक रूप से भारत के लोगों पर निर्भर है । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत में व्यापार के लिए बहुत ही बड़ा मार्किट है । रही बात भारत के पिछड़ेपन की भारत नहीं पिछड़ा बल्कि यहाँ के लोगों की मानसिकता पिछड़ी है । दूसरे देशों के लोग काम को ही जूनून मानते है एवं एन्जॉय करने के लिए उनकी एक दिनचर्या है जिससे उनका जीवन तनावरहित रह पाता है । परन्तु भारत के लोगों के पास ऊर्जा दूसरे देशों के लोगों की 200 प्रतिशत है परन्तु वे अपनी ऊर्जा काम करने में नही बल्कि व्यर्थ की सोच , तनाव एवं निंदा चुगली एवं खुद , खुद के समाज एवं खुद देश के बारे में नकारात्मक बाते करने में गुजार देते हैं । इतना सब कुछ करने के बाद उनके पास ऊर्जा ही नहीं रहती तो वे नया रचनात्मक कैसे करेंगे , वे पुराने को ही क्रियात्मक ढंग से नहीं कर पाते । रही बात फैशन की तो विदेशों में तो चलता है शोंक और भारत में चलता है साँसों की जरूरत जिस कारण से प्रत्येक मध्यम वर्गीय इंसान महंगे मोबाइल , महँगे कपड़े , महंगे घर के अन्य फ़िज़ूल शोंक में खुद की ऊर्जा , धन एवं समय व्यर्थ कर खुद को तनाव के घेरे में ले लेता है फिर उसे बिमारियों का बुलावा आ जाता है । आजकल एक नई बीमारी मोबाइल और उस पर इंटरनेट की चल गई है दूसरे देश के लोग काम के वक़्त काम और मस्ती के वक़्त मस्ती करेंगे परन्तु हमारे भारत में काम के वक़्त इन्टरनेट चैट वगैरा में मशगूल बाकि वक्त में एन्जॉय या आराम ।तो रचनात्मक के लिए न बचा समय और ऊर्जा ।
उस व्यक्ति में करारे जवाब में कहा आज बेशक इन्टरनेट चैटिंग , फेसबुक , व्हाट्स एप्प या अन्य फैशन के हथियारों की गलत फहमी के सुकून में लोग उलझे हैं लेकिन जिस दिन मेरे भारत के लोग फैशन , चैटिंग एवं निंदा चुगली आदि नकारात्मक बीमारियों से निकलकर अपनी पूरी ऊर्जा जो कि दूसरे देशों के लोगों के 200 प्रतिशत के बराबर है लगाने लग गये । उस दिन कोई भी देश भारत के आस पास भी नहीं भटकेगा ये मेरा वादा है । देखो वो आदमी भारत आ कर कब लोगों को समझाता है और कम मेरा भारत बदलने लगता है ।

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |
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