ऐसा क्यूँ होता है

डॉ. नितेश धवन

रचनाकार- डॉ. नितेश धवन

विधा- कविता

ऐसा क्यूँ होता है
जब कभी मन बहुत उदास होता है
मुसाफिर मंज़िलों का थककर
अपने अतीत मेँ झांकता है
वो छोटी छोटी खुशियों
और यादों के गुलदस्ते मेँ
न उम्मीदों का बोझ
न कुछ खोने का डर
वो बेफिक्री की नीँद
अँजाम से बेख़बर
हर पल को जी भर जी लेने का जूनून
माँ की गोद का वो सुकून
आज हसरतों के हुजूम में
सब पीछे छूट गया है
सपनों के शीशमहल में
अपना घर टूट गया है ……

'नितेश'

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डॉ. नितेश धवन
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समाजकार्य विषय में डॉक्टरेट तथा एम०फिल० की उपाधि , यू० जी०सी० - नेट ।" सोशल वर्क फॉर यू॰जी ॰सी॰ - नेट " शीर्षक पुस्तक मेकग्रा हिल द्वारा प्रकाशित । सोशल वर्क पर्सपेक्टिव्स : दर्शन एवं प्रणाली शीर्षक पुस्तक भारत प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, "आवरण के पीछे से " काव्यांजलि का प्रकाशन । वर्तमान में दिग्दर्शक/करिकुलम मैगज़ीन में सामाजिक मुद्दों पर लेख प्रकाशित हो रहे है ।

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