ऐसा अपना टीचर हो

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

मेरी बाल्यकाल की एक रचना , पुरानी भावनाये ताजा होने पर आपसे सांझा करने का मन हुआ ।
।।।।।।।।ऐसा अपना टीचर हो।।।।।।।

ऐसा अपना टीचर हो
अच्छा जिसका नेचर हो
मुख पर हर दम स्माइल हो
ऐसा उसका स्टाइल हो
जिद का वो अड़ियल हो
अंदाज न उसका सड़ियल हो
सादगी की मिसाल हो ।
आवाज में मिठास बेमिसाल हो ।
पढ़ाई का ऐसा जादू कर डाले
खेल खेल में हर चैप्टर कर डाले
ऐसी बात वो कहता हो ।
सबके हर्ट में रहता हो ।
कर दे वो ऐसी मेहरबानियाँ
याद करूँ मैं हरदम, उसकी कुर्बानियां
© कृष्ण मलिक 31.03.2014

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

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