एम.ए.पास न होता (गीत)

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- गीत

दिन भर करता काम-काज
मैं, रात नींद भर सोता ।
कितना अच्छा होता जो मैं
एम.ए. पास न होता ।।

गांव छोड़कर क्यों मैं रहता
इस शहरी माहौल में ?
क्यों आगे मैं करता खुद को
रोज़गार की दौड़ में. ?
नेताओं के पीछे लगकर
क्यों ईमान को खोता. ?

बड़े भोर उठकर के मैं तो
जाता अपने खेत पर ।
रोटी रख देती फिर माता
सब्जी, चटनी, प्यार भर ।
प्यार भरी वह रोटी खाकर
खेत में गेहूं बोता ।।

श्रमबिंदु लेकर माथे पर
वापस आता शाम को ।
माता के दर्शन से मित्रो
पा जाता आराम को ।
मातृस्पर्श की मृदु-छाया में
सदा प्रफुल्लित होता ।

कितना अच्छा होता जो मैं
एम. ए. पास न होता ।।

ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक ।
" यह गीत मैंने अपने विद्यार्थी जीवन में रचा था ।"

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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