एक स्वप्न सलोना

Vandaana Goyal

रचनाकार- Vandaana Goyal

विधा- कविता

इक स्वपन सिलौना……
वो स्वपन सिलौना
दिल का खिलौना
मोम की गुडिया
आग का दरिया
कागज की कश्ती
सुनसान सी बस्ती
तेरा खोना,मेरा खोना
वो स्वपन सिलौना……
अँधेरी रातें
वो भूतों की बातें
हवाओ का ना चलना
पर पत्तो का हिलना
तेरा गिरना,तेरा सँभलना
मेरा हँसना,तेरा रोना
वो स्वपन सिलौना……
चॉद का हँसना
तारो का बिखरना
सॉसों की गर्मी से तेरी
सूरज का धीरे से पिघलना
फूलो का खिलना
कलियों से मिलना
तेरा धागों में उन्हे पिरोना
वो स्वपन सिलौना……
रात तेरा छत पर आना
कुछ मेरी सुननास
कुछ अपनी सुनाना
नजरे झुकाना,नजरे मिलाना
हाथो से हाथो का छुडाना
ईशारो से मुझको समझाना
होके रहेगा जो है होना
वो स्वपन सिलौना…….
उफ!ऑख का खुलना
कॉच सा चटकना
कॉटे सा अटकना
बिखरा असबाब
छिटके ख्बाब
छूट गया हाथो से हाथ
हुआ न वो,जो था होना
टूट गया वो स्वपन सिलौना
वो स्वपन सिलौना
वंदना मोदी गोयल

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Vandaana Goyal
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बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद

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