एक सुबह

dr. pratibha prakash

रचनाकार- dr. pratibha prakash

विधा- कविता

एक सुबह देखी मैंने खंजन
तरुवर साख पे वो बैठी थी
नैन बसी कोई अभिलाषा
वो हृदय आस लिए बैठी थी
आते जाते हर पंक्षी को वो
विरल भांति से तकती थी
जैसे कोई लाया हो सन्देशा
फिर निरा उदास वो होती थी
साहस कर एक दिन उड़ बैठी
गगन ऊंचाई जब उसने नापी
प्रसन्न मुख हिलोर हृदय थी
मन मधुवन सावन हरषाया
पाया भान आनन्द गगन का
सुखद अनुभव वो ईश मिलन का
उठ मनुज क्यों तू अलसाया
कर पुरुषार्थ क्यों तू भरमाया
लक्ष्य तेरा है तुझे पुकारे
खंजन भांति तू किसे निहारे
सोच जरा क्यों जन्म मिला है
मानव श्रेष्ठ का देह मिला है
उद्देश्य क्या तेरे जीवन का
किसने प्राण वरदान दिया है
एक मात्र सत्य वही सृष्टि का
अंश उसी का तुझमे खिला है
सत्य प्रेम का विस्तार करो
सर्वोच्च शक्ति का वरदान बनो
सर्वोत्कृष्ट कृति तुम जिसकी
उसके ही मार्ग का ध्यान धरो

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dr. pratibha prakash
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Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।
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