“एक शेर दूसरा सवा शेर”

Mahender Singh

रचनाकार- Mahender Singh

विधा- शेर

**शेर :-

तप रहा है सूरज
पर "अ इंसान"
तेरे मिजाज से ज्यादा गर्म नहीं,

दोहा:-
लाखों करोड़ो जन खड़े,रहे एक-दूजे को देख,
बिन बोले मालूम नहीं, ह्रदय क्या-क्या रहे छुपाय,

अर्थात् :-
भीड़ के मंसूबे खतरनाक,
विक्षिप्त मन और भी खतरनाक,
बिन दिशा उद्देश्य भ्रामक,
दो पैरों का सामंजस्य गति बढ़ाता है,
जीव व जीवन से प्रेम धर्म का आधार है,

डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया

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Mahender Singh
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पेशे से चिकित्सक,B.A.M.S(आयुर्वेदाचार्य)

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