एक विचार आया था मन में

Pooja Singh

रचनाकार- Pooja Singh

विधा- कविता

"एक विचार आया था मन में ,
हमने क्या किया जीवन में,
भूल गए वीरों का बलिदान ,
शायद हम भी थे कभी गुलाम !
किसी पिंजड़े में बंद पंछी से पूछो ,
कैसी व्यथा है उसके मन में ?
बस एक बार मौका मिल जाये ,
तो मै उड़ जाऊ पंख पसार!
बस यही चाह थी उनके मन में ,
तभी तो हुआ था हिन्द आजाद !
प्रान्त प्रान्त में भेद बांटते ,
उत्तर दक्षिण बैर करते
मचा दिया है हाहाकार ,
बन गया मेरा देश गुलाम !
कुर्सी की इस दौड़ मे ,
हम आ गए ऐसे मोड़ पे
आगे कूआ पीछे खाई ,
देदेते हैं वोट सोचकर
संग हमारे हैं श्री राम ,
भगवान् भरोसे हिंदुस्तान !
कल तक थी जो सोने की चिड़िया ,
बन गयी आज माटी की पुड़िया
किया इसे अपनों ने बदनाम ,
भगवान् भरोसे हिंदुस्तान !
भूल गए पटेल की सीख ,
सोचा आज़ादी मिल गयी है भीख !
लालच हत्या और भ्रष्टाचार ,
भगवान् भरोसे हिंदुस्तान !
चन्द वोट और सिक्को की खातिर ,
बेच दिया अपने जमीर को
क्या यही हमारी है पहचान ,
भगवान् भरोसे हिंदुस्तान !
फिर भी अभी नहीं कुछ बिगड़ा ,
हमको है आतंक से लड़ना
बन सकता है बिगड़ा काम ,
युवा भरोसे हिंदुस्तान !
बस एक बात रखना है मन में ,
सबसे प्यारा भारत नाम
हिंदी हिन्दू हिंदुस्तान
ना हिन्दू न मुस्लमान ,
सब है भारत की पहचान
यही विराजे चारो धाम ,
जय भारत जय हिंदुस्तान
भगत सुभाष और रतन महान ,
ये है उनका तीर्थ स्थान
किया इन्होंने ऐसा काम ,
बन गया मेरा देश महान !
जय भारत जय हिंदुस्तान !! "

Sponsored
Views 23
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pooja Singh
Posts 17
Total Views 627
I m working as an engineer in software company .I m fond of writing poems .

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia