एक बार दिल लगाते तो जरा

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- मुक्तक

एक बार दिल लगाते तो जरा ।
दिल लगा कर पास आते तो जरा।
तुम तो मुस्कराए और चल दिए।
कभी पास आकर हमें भी हंसाते तो जरा।

हंस कर दो पल बिताते तो जरा
दो शब्द प्यार से बतियाते तो जरा
तुम तो आये और चल दिए
हाल दिल का पूछ जाते तो जरा

कभी इश्क़ की सज़ा बताते तो जरा
दिल की धड़कन को सुन जाते तो ज़रा
दिल आज भी तुम्हारे लिए धड़कता है
इस धड़कते दिल का इलाज़ बताते तो जरा

हक़ीकत नही ख़्वाबों में आते तो जरा
हाल ऐ दिल अपना बताते तो जरा
दिल नाज़ाने कितने ख़्वाब बुनता है
ख़्वाबों में ही अपना बनाते तो जरा

भूपेंद्र रावत
13।08।2017

Sponsored
Views 63
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Bhupendra Rawat
Posts 114
Total Views 5.8k
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia