* एक बहिन की पीड़ा *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

यह कविता नहीं है एक बहन की पीड़ा है ********************************
राखी की पूर्व सन्ध्या पर स्मरण दिलवाने के वास्ते ताकि नहीं हो भाई-बहिन के अलग- अलग रास्ते
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आज राखी है
फिर भी कुछ
बहनों के दिल
में तन्हाई है
क्या
भारतीय संस्कृति
बिकती जा रही है
क्या त्योंहार की महिमा
टिक नहीं पायी है
हाल बतला न पाती है
बहन ना चाहती है दौलत
और गहने
भाई बहिन का प्यार
कहीं आज
हो गया दरकिनार
होता था कभी
इस धागे से इतना प्यार
आज कहां खो गया
आपस का वो प्यार
आज राखी है फिर भी
कहां अपने दिल को
बहना रख पाई है ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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