** एक प्रेमिका ने प्रेमी से कहा **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- अन्य

एक प्रेमिका ने प्रेमी से कहा
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पत्थरों से दिल लगाने से क्या मिलेगा

दिल ही लगाना है तो फूलों से लगाओ

प्रेमी ने बहुत ही सुंदर जवाब दिया

फूलों से भी क्या दिल लगाना

आज लगाया तो कल दिल मुरझाया

पत्थरों में ही है सच्ची वफ़ा का साया

फूलों की तरह नाजुक हसीनाओं ने तो

बेरहमी से आशिकों का दिल ठुकराया

पत्थरों पर तो लिखा दिलबर का नाम

कभी आसानी से क्या कोई मिटा पाया ।।
👍मधुप बैरागी

धुंधली-सी उनकी परछाई

मेरे सीने में उतर आई है

वो ख्वाब है या हकीकत

जो नजरों में समायी है।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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