एक दीपक ही अंधेरा निगल जायेगा

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- कविता

बचकर चलते रहो ठोकरें देखकर
जमाना कभी तो बदल जायेगा
कांटे कितने पडे बडी बाधा बने
फिर तो कांटे से कांटा निकल जायेगा
ये अंधेरा घना जानपर आ बना
एक दीपक अंधेरा निगल जायेगा
एक आशा करो राहपर आ चलो
हर पहेली का हल भी निकल आयेगा
विन्ध्य सा बन खिलो नव प्रकाशित करो
वरना अंधेरे का जादू चल जायेगा
विन्ध्यप्रकाश मिश्र
प्रतापगढ उ प्र
९१९८९८९८३१

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Vindhya Prakash Mishra
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