एक कैरिबियाई रात

Mahendra singh kiroula

रचनाकार- Mahendra singh kiroula

विधा- कविता

एक रात महासागर किनारे,
प्रसिद्ध चिंचिलाद के द्वारे,
मनोरंजन , सोमरस मे लिप्त,
भीड़ मे हम और हमारे.

मदिरा का अनियंत्रीत पान,
और कुछ भी अधरों से बखान,
कैरिबियाई त्यौहार सा नृत्य,
मित्र का वहां था ध्यान.

अमेरिकन गुड़िया का मन,
न होश , न लिहाज़ और न कोई संतुलन.
कभी कोई कभी कोई,
और एक उसका दुश्मन.

वो गिरने को हुआ रेत पर
यु रात ने बदली करवट
देखा ये कह दिया
“यू टू बिग फॉर हिम ” सरपट

इतने मे सब कांच सा टूटा
सखी का ज्वालामुखी यु फूटा
तितर बितर , सब हुआ वहा से,
और हमारा मित्र भी रूठा.

ये मदिरा क्यों हाथ बढ़ाये,
क्यों ये अपने पीछे आये
नहीं चाहिए इसका साथ .
कह दो जहा जाना इसको जाए.

Views 6
Sponsored
Author
Mahendra singh kiroula
Posts 3
Total Views 704
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia