“एका त्योहार”

RAJESH BANCHHOR

रचनाकार- RAJESH BANCHHOR

विधा- कविता

*******************दीवाली सा हर दिन लगे
और दशहरे सी रात !
होली जैसी दोपहरी
हो रोज खुशी की बात !!
पर आज दीया जले आगजनी सा
राम राज में रावण पलता !
गुलाल में है बारूद की असर
घड़ी-घड़ी अन्याय क्यों बढ़ता ?
हम सब ऐसा कसम उठाएँ
अब "एका त्योहार" मनाएँ !
अन्याय जहां टिक न पाए
ऐसा एक नवभारत बनाएँ !!
*******************

Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
RAJESH BANCHHOR
Posts 7
Total Views 133
"कुछ नया और बेहतर लिखने की चाह......" राजेश बन्छोर "राज" जन्मतिथि - 05 जून 1972 शिक्षा - सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा सम्पर्क - वार्ड-2, पुरानी बस्ती हथखोज (भिलाई),पोस्ट - सुरडूंग, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ 490024 मो. नं. - 7389577615 प्रकाशन संदर्भ - पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर कविता, कहानी प्रकाशित

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia