एकता के गीत गायेंं, हो परस्पर प्यार इतना( गीत)पोस्ट २९

Jitendra Anand

रचनाकार- Jitendra Anand

विधा- गीत

एकता के गीत गायें
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हम रचाने आ गये संसार फिर स्वप्निल धरा पर
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।

सत्यता हो मूल्य शाश्वत , हो समय स्वर्णिम सबेरा
दूर हो तिमिरांध जग का ,हो भले कितना घनेरा
हम मधुर संगीत के सँग नित् नवल गायें ऋचाएँ
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।

भूल कर बातें वििगत की, छोड़ कर सारे फसाने
एक क्या अनगिन धरा पर सूर्य हैं हमको उगाने ।
दूर हो पतझरनुमा संत्रास यह मधुमास लायें ।
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।
—– जितेंद्रकमलआनंद

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हम जितेंद्र कमल आनंद को यह साहित्य पीडिया पसंद हैं , हमने इसलिए स्वरचित ११४ रचनाएँ पोस्ट कर दी हैं , यह अधिक से अधिक लोगों को पढने को मिले , आपका सहयोग चाहिए, धन्यवाद ----- जितेन्द्रकमल आनंद

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One comment
  1. एकता स्वयमेव एक सुंदर गीत से कम नहीं है,इसलिए एकता और प्यार का गीत लिखने के लिए आपको कोटिश: शुभकामनाएँ।