ऋतु बसंत की जब है आती

बसंत कुमार शर्मा

रचनाकार- बसंत कुमार शर्मा

विधा- गज़ल/गीतिका

ऋतु बसंत की जब है आती
कली कली दिल की खिल जाती

फूल खिले हैं रंग बिरंगे,
तोड़ रहीं हैं कलियाँ बंधन
यहाँ वहां सारी बगिया में,
करते फिरते भँवरे गुंजन

कहीं नाचता मोर कहीं पर,
गीत प्रेम के कोयल गाती

पंछी छोड़ घोंसला निकले,
दिल में छायी हुई उमंगें.
आसमान में नीली पीली,
नाच रही हैं खूब पतंगें.

आम लगे हैं अब बौराने,
अमियाँ सुधि मुंह पानी लाती

Views 1
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बसंत कुमार शर्मा
Posts 85
Total Views 1.1k
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia