उड़ता पंछी

Shubha Mehta

रचनाकार- Shubha Mehta

विधा- कविता

मैं , उड़ता पंछी
दूर -दूर
उन्मुक्त गगन तक
फैलाकर अपनी पाँखें
उड़ता हूँ
कभी अटकता
कभी भटकता
पाने को मंजिल
इच्छाएँ ,आकांक्षाएँ
बढती जाती
और दूर तक जाने की
खाता हूँ कभी ठोकरें भी
होता हूँ घायल भी
पंख फडफडाते है
कुछ टूट भी जाते हैं
फिर कोई अपना सा ..
कर देता है
मरहम -पट्टी
देता है दाना -पानी
जरा सहलाता है प्यार से
जगाता है फिर से प्यास
और ऊपर उड़ने की
और मैं चल पडता हूँ
फिर से पंख पसार
अपनी मंजिल की ओर ….।

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 41
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Shubha Mehta
Posts 15
Total Views 608

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
2 comments