उसे गुरूर है

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- शेर

उसे गुरूर है अपने चेहरे की मासूमियत पर
उसने मेरी आँखों की गहराई नहीं देखी।
**** ****
जिनका हर इक आंसू मैंने मोती की तरह संभाल रखा था,
उनसे गुजारिश है मुझे मेरी मुस्कान लौट दे।
**** ****
जो शख्स प्यार करता है,वो याद नही आता
वो ही याद आता है, जो प्यार नहीं करता।
**** ****
एक आरज़ू, एक तलाश एक ही इंतजार है
कभी वो भी कहे, मुझे तुमसे प्यार है।
**** ****
ज़रा सी याद क्या आती है तुम्हारी जुल्फ़े
बादलों को अपना रंग फीका लगता है।
**** ****
तन्हाई और ये बैरी इंतजार,
न ख़ुद ख़त्म होंगे न मुझे ख़त्म होने देंगे।
**** ****
बस ये ही सोचकर छू ली हमने बारिश की बूंदें
उन्हें भी यो भिगोया होगा इस बारिश ने कहीं न कहीं।
**** ****

Sponsored
Views 140
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
विनोद कुमार दवे
Posts 43
Total Views 3.5k
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन की प्रक्रिया में। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia