उरियां क़बा न दे

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

रचनाकार- मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

विधा- गज़ल/गीतिका

मैला लिबास दे मुझे उरियाँ क़बा न दे
दौलत दे बे शुमार ज़रा सा नशा न दे

डालूं जिधर नज़र तेरी रहमत है बे शुमार
तूने दिया जो हमको कोई दूसरा न दे

तेरी नवाज़िशों के सबब जी रहे हैं हम
दुनिया का बस चले तो ये हमको मिटा न दे

मोमिन के लिये ज़हर है ये मग़रिबी चलन
क़ौम ए मुहम्मदी को कहीं वरग़ला न दे

निकले हरेक लफ्ज़ से तारीफ़ बस तेरी
शिकवा करूँ मै तुझसे कभी होसला न दे

अल्लाह अपने ख़ौफ़ से भरदे क़मर का दिल
वादे किये जो तुझसे कहीं वो भुला न दे

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मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी
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