उन बिन, अँखियों से टपका जल

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गज़ल/गीतिका

उन बिन,अँखियों से टपका जल
अमल कपोलों पर अटका जल

घन गरजे , चमकी बिजली तो
झटका लगा, हृदय खटका जल

आई आहट ,आँख गढ़ गई
मुस्काया, उरमय घट का जल

कोउ और है,पुनः करुण रस
रूपी मन बन ,पुनि भटका जल

सारी रात, जागते बीती
तरस गए दृग- घूँघट-काजल

कांहा तेरी चतुर चाल से
विवस हुई, मन पिय- घट का जल

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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