उन्हें इश्क़ है हमसे

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- शेर

उसका कुछ नही बिगड़ा 'दवे' तेरी नाराजगी देख कर भी,
मेरे आंसुओं का क़र्ज़ न उतारा गया,
और वो हंस कर नहीं बोली मुझसे आज एक बार,
मैं दिन में कितनी बार बेमौत मारा गया…….

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इस गफलत में मत रहना के ये वक़्त तेरा है,
वक़्त किसी का नहीं होता न तेरा न मेरा है…
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ये अजीब सी उलझन में फंस गया मजाक मजाक में,
उन्हें इश्क़ है हमसे और इजहार मुमकिन नहीं.
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मैं चला तो जाऊ तुमसे दूर मगर,
ये सोच कर लौट आता हूँ.
तेरा ख्याल तुझसे नहीं रखा जाएगा,
मेरा ख्याल मुझसे नहीं रखा जाएगा.
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उसपर क्या भरोसा करूँ तू ही बता मेरे दोस्त,
जिसकी आँखे खूबसूरत,मगर नजर खराब है……..

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन की प्रक्रिया में। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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