उठो सैनिकों वार करो

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लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

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उठो सैनिकों वार करो,
स्वयं युद्ध की रणनीति तैयार करो।

दिल्ली के आदेशों का,
अब ना वीरों तुम इन्तज़ार करो।

थाम बागडोर हाथों में,
स्वयं युद्ध का अब आगाज करो।

रौद्र रूप कर लो धारण,
अब भीषण नर संहार करो।

एक युद्ध दुष्टों से,
करके आर करो या पार करो।

हाथ बांधे क्यों बैठे हो,
उठ स्वयं दुश्मन पर प्रहार करो।

आतंकी गद्दारों को
चुन-चुन कर तुम वार करो।

बहुत हो चुका बर्बरता,
अब वीरों तुम हुंकार भरो।

व्यथित है भारत माँ,
बस इतना तुम उपकार करो।

दो शीश के बदले सहस्र लाओ,
इसमें ना तनिक विचार करो।

वक्ष चीर दुश्मन के शोणित से,
भारत माता का श्रृंगार करो।

माँ-बहन की चूड़ी-राखी का,
जल्द से जल्द इनसाफ़ करो।

पाक के नापाक इरादों को,
अब क्षण में चकनाचूर करो।

देखो व्यर्थ ना जाये कुर्बानी,
खत्म पाक का नामोनिशान करो।

विजय पताका फहरा कर,
भारत माँ की ऊँची शान करो।

उठो सैनिकों वार करो,
स्वयं युद्ध की रणनीति तैयार करो।
🌹🌹🌹🌹—लक्ष्मी सिंह 💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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