उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद लड़कियों को नौकरी करनी चाहिए या नहीं और क्यों

Naveen Jain

रचनाकार- Naveen Jain

विधा- लेख

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद लड़कियों को नौकरी करनी चाहिए या नहीं और क्योंउच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद लड़कियों को नौकरी करनी चाहिए या नहीं और क्यों

उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद लड़कियों का नौकरी करना जरूरी है और लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी करनी चाहिए क्योंकि इससे वे स्वावलंबी बनेंगी, आत्मनिर्भर बनेंगी और उन्हें उनके कार्यक्षेत्र पर उन्हें अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्राप्त होगा, उन्हें वहाँ अपने विचारों को प्रस्तुत करने का और अन्य व्यक्तियों के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा । यदि लड़कियाँ नौकरी करती हैं तो अपने अधिकारों के लिए जागरूक होंगी और अपने व अन्य स्त्रियों के अधिकारों की रक्षा कर सकेंगी और यदि वे नौकरी करती हैं तो ये उन व्यक्तियों पर तमाचा होगा जो रूढ़िवादी मान्यताओं के कारण स्त्रियों को अबला, और पुरूषों के समक्ष तुच्छ समझते हैं ।
लड़कियों का नौकरी करना उनकी स्वतंत्रता, और पुरुषों से समानता को दर्शाएगा । भारतवर्ष में नारी शक्ति, मातृ शक्ति का अत्यधिक महत्व है , कितनी ही वीरांगनाओं ने पुरूषों से बढ़कर कार्य किए हैं, रानी लक्ष्मीबाई के समक्ष कितने ही फिरंगियों ने दाँतों तले उंगली दबा ली और घुटने टेक दिए; तो इतिहास गवाह है जब- जब नारी शक्ति ने नेतृत्व किया है और कार्यक्षेत्र या रणक्षेत्र पर अपना कौशल दिखाया तो अखिल विश्व को अचंभित कर दिया । कल्पना चावला जो कि प्रथम भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री थीं, किरण बेदी जो कि भारत में प्रथम महिला आई.पी.एस. थीं, प्रतिभा पाटिल जो कि भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति थीं और श्रीमती इंदिरा गांधी जो कि भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं आदि ऐसी अनेकानेक महिलाएँ हैं जिन्होंने अपने कार्य के प्रति समर्पित होकर, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर, उच्च पदों को प्राप्त कर , ईमानदारी व लगन से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है । तो हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि यदि लड़कियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी करतीं हैं तो ये देश और समाज के लिए गौरव की बात होगी और इससे देश की परिस्थितियाँ सुदृढ़ होंगी व अर्थव्यवस्था भी उन्नत होगी ।
लड़कियों के नौकरी करने के उपरांत उनका घरेलू कार्य भी प्रभावित नहीं होगा क्योंकि विनम्रता, लज्जालुता उनके स्वाभाविक गुण हैं; वे त्याग की मूर्ति होती हैं इन्हीं गुणों के कारण वे ऐसा तालमेल बैठा सकती हैं कि उनके नौकरी करने से ना तो घरेलू कार्य प्रभावित हों ना ही कार्यक्षेत्र के कार्य । मेरे इन विचारों के आधार पर मैं इस बात का समर्थन करता हूँ कि लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी करना चाहिए और सभ्य समाज को भी उनका सहयोग और समर्थन करना चाहिए ।

– नवीन कुमार जैन

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मैं कवि नहीं, मैं कवि नहीं , ना मैं रचनाकार । मैं तो कविता रूप में व्यक्त करता अपने विचार ।। नाम - नवीन कुमार जैन पता - बड़ामलहरा जिला - छतरपुर म.प्र. मेरी स्वलिखित प्रकाशित पुस्तक - मेरे विचार , है । लिखना मेरा शौक है पर ख्वाब कुछ और ही है ।
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