ईश्वर

सुनील पुष्करणा

रचनाकार- सुनील पुष्करणा "कान्त"

विधा- अन्य

भूमि, अग्नि, वायु, गगन, नीर
के सम्मिश्रण के साथ
ईश्वर सृष्टि के कण-कण में है व्याप्त
मनुष्य इन्हीं पंचतत्वों का है मिलाप…
कर्मों से है मानव-दानव का प्रताप
मानवता है ईश्वरत्व का प्रसाद…

सुनील पुष्करणा

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