ईर्ष्या

राम केश मिश्र

रचनाकार- राम केश मिश्र

विधा- दोहे

दोहे।ईर्ष्या।

ईर्ष्या दुख की बावली,,,,,,,जो उर रखो सजोय ।
मान हानि धन धर्म की,,,,, तन की दुर्गति होय ।।

ईर्ष्या मन का रोग है,,,,,,,, करो त्वरित उपचार ।
देख विरोधी का भला,,,,,,, खुद पर करे प्रहार ।।

ईर्ष्या की औषधि अमिट, मन में रही जो व्याप्त ।
राम योग सन्तोष से,,,,,,,,,, दैनिक ध्यान प्रयाप्त ।

©राम केश मिश्र

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राम केश मिश्र
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राम केश मिश्र मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , नवगीत, दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।
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