“ईर्ष्या” (मनोद्गगार)

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- अन्य

"ईर्ष्या"
आज शून्य को तकती
प्यासी नज़रें
कुछ तलाश रही हैं……
किसे मालूम था—
तप्त रेत में जिन अल्फ़ाज़ों को
उकेरती मेरी तूलिका
अरमानों के रंग भर रही है
उन्हें समंदर की ईर्ष्यालु लहर
बहा ले जाएगी।
डॉ.रजनी अग्रवाल
"वाग्देवी रत्ना"

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Dr.rajni Agrawal
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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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