ईमानदार भारत

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

[3/12, 11:10] Vijay Kumar Agarwal:
रंगो का त्योहार है आया ,घर घर देश मे कमल खिलाया
उत्तर प्रदेश की जनता बोली ,मोदी के संग खेले होली
उत्तराखंड ने साथ निभाया ,गोआ मणिपुर कठिन है भाया
शायद कुछ कमियां रह गई थी , कमल पंजाब मे खिल नही पाया
जात पात कि राजनीति अब ,अधिक समय नही चल पायेगी
सुख का सूरज उदय हो रहा ,दुःख की संध्या ढल जायेगी
भ्रष्टाचारी समझ लो तुम भी ,अब तुम्हारी बारी आयेगी
या तो भ्रष्टाचार छोड़ दो ,वरना नौकरी छूट जायेगी
खुद से पहले देश की सोचो ,तभी नौकरी चल पायेगी
आपकी ईमानदारी के सामने ,नेता की नही चल पायेगी
भारत को है स्वच्छ बनाना ,कसम यदि हम खा पायेंगे
नेता क्या मंत्री भी तुम्हारा ,बाल ना बाँका कर पायेंगे
भ्रष्टाचार से मुक्त करेंगे ,ईमानदारी के बीज बोयेंगें
सत्तर साल से फैली गंदगी ,ईमानदारी से हम धोयेँगे

विजय बिज़नोरी

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विजय कुमार अग्रवाल
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मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।

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